30 मार्च 2019 - 18:10
गोलान हाइट्स पर इस्राईल के अतिग्रहण को मान्यता, अरबों के लिए ख़तरे की घंटी

ईरानी विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने सीरिया के अतिग्रहित गोलान हाइट्स इलाक़े के बारे में अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के हालिया ग़ैर क़ानूनी क़दम की प्रतिक्रिया में, अरबों को सचेत किया कि वे जितना भी नत्मस्तक हो जाएं अमरीका और ज़ायोनी शासन उनकी भूमि हड़प कर रहेंगे।

ज़रीफ़ ने ट्वीट किया कि अतिग्रहित पूर्वी अलक़ुद्स के बारे में ट्रम्प के पिछले साल के क़दम के बाद, गोलान के बारे में उनका मनमानी भरा एलान, मुसलमान राष्ट्रों को एक चेतावनी है। उन्होंने अरबों और मुसलमानों से एकजुट होने की अपील की।

अमरीकी राष्ट्रपति ने 25 मार्च 2019 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और अंतर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करते हुए, एक आदेश पर दस्तख़त किए जिसके अनुसार वॉशिंग्टन सीरिया के गोलान हाइट्स इलाक़े पर इस्राईल की जाली संप्रभुता को मान्यता देता है।

ट्रम्प का यह क़दम "डील ऑफ़ द सेन्चरी" नामक योजना का हिस्सा है जो सऊदी अरब, संयुक्त अरब इमारात और बहरैन सहित अरब देशों की इस्राईल के साथ साठगांठ की नीति के तहत लागू हो रहा है।

राजनैतिक टीकाकार मोकर्रम मोहम्मद अहमद ने बुधवार को मिस्री अख़बार अलअहराम में लिखाः "सीरिया के गोलान हाइट्स के ख़िलाफ़ ट्रम्प के फ़ैसले से, अरबों के संबंध में अमरीका की मौजूदा सरकार की दुर्भावना से पर्दा उठा गया और यह इस बात की ओर इशारा है कि निकट भविष्य में अरब क्षेत्र के लिए बड़ा ख़तरा मंडरा रहा है जिसके मद्देनज़र अरब देशों में आपस में एकता अपरिहार्य ज़रूरत बन गयी है।"

ट्रम्प सरकार की 6 दिसंबर 2017 से अब तक की गतिविधियां अरबों व मुसलमानों के ख़िलाफ़ रही हैं। अमरीकी दूतावास के तेल अविव से अतिग्रहित क़ुद्स स्थांतरण पर कुछ अरब देशों की उदासीनता से मौजूदा अमरीकी सरकार इतनी दुस्साहसी हुयी कि उसने सीरिया के अतिग्रहित गोलान हाइट्स के बारे में मनमानी भरा एलान किया।

ज़ायोनी शासन की जर्जर सुरक्षा स्थिति की रक्षा के लिए अरब देशों को कमज़ोर करना ट्रम्प सरकार की स्पष्ट नीति है। ऐसे हालात में अपने क़ानूनी अधिकार की रक्षा के लिए अरबों और मुसलमानों में एकता ही, इस्राईल और अमरीका द्वारा अरबों की भूमि के हड़पने की जारी प्रक्रिया को रोक सकती है।